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शनिवार, सितंबर 10, 2011

सम्मान के लिए जीतना ही होगा

भारतीय टीम का इंग्लैण्ड दौरा समापन की ओर है . टीम इण्डिया जब इस दौरे पर गई थी तो वह टेस्ट मैचों में नम्बर वन थी , तो एकदिवसीय मैचों में विश्व चैम्पियन . लेकिन इंग्लैण्ड दौरे पर टीम की जो दुर्दशा हुई है उससे तमाम क्रिकेट प्रेमी परिचित हैं .अब तो इस बात का खतरा मंडराने लगा है कि शायद टीम जीत का स्वाद चखे बिना ही लौटेगी. अगर ऐसा हुआ तो यह बेहद शर्म की बात होगी .
             टीम इंडिया को सम्मान बचाने के लिए जीतना ही होगा , लेकिन अब उनके पास सिर्फ दो मैच हैं . जीत के लिए नए सिरे से और नई रणनीति से उतरना होगा . जडेजा ने टीम के साथ जुड़ते ही जैसा प्रदर्शन किया है , वह काबिले-तारीफ़ है , लेकिन कोहली , रैना और सभी गेंदबाज़ लगातार निराश कर रहे हैं . रैना को यदि कम समय मिलता है तो वह आक्रामक और आकर्षक पारी खेलता है , लेकिन जैसे ही उस पर लम्बी पारी खेलने की जिम्मेदारी आती है तो वह बुरी तरह से असफल होता है . पहले टेस्ट मैचों और फिर तीसरे एकदिवसीय में वह असफल रहा जबकि टी-20 और पहले दोनों मैचों में वह अच्छी बल्लेबाज़ी कर पाया क्योंकि उन मैचों जब वह पिच पर उतरता था तो डैथ ओवर शरू हो जाते थे . एक मुख्य बल्लेबाज़ का काम लम्बी पारी खेलना होता है , जिसमें वह नाकाम रहा है . कोहली और द्रविड़ के बल्ले से भी लम्बी पारी निकलनी शेष है , हालांकि टेस्ट मैचों की तुलना में टीम इंडिया ने एकदिवसीय मैचों में अच्छी बल्लेबाज़ी की है , एकदिवसीय मैचों में हार का कारण गेंदबाज़ ही हैं और जीत हासिल करने के लिए इसी क्षेत्र में सुधार की सख्त जरूरत है .
                इंग्लैण्ड की पिचों को देखते हुए टीम में तीन तेज़ गेंदबाज़ और एक स्पिनर रखा जा रहा है . यह एक सही फैसला लगता है लेकिन दुर्भाग्यवश कोई भी तेज़ गेंदबाज़ उम्मीद पर खरा नहीं उतर रहा . हो सकता है कि चौथे मैच में वरुण आरोण या विनय कुमार को आजमाया जाए लेकिन अन्य तेज़ गेंदबाजों की असफलता को देखते हुए इनके सफल होने पर संदेह है . ऐसे में टीम इंडिया को दो स्पिनरों के साथ उतरने पर विचार करना चाहिए . तीसरे वनडे में जडेजा ने 9 ओवर में 42 रन , अश्विन ने 9 ओवर में 40 रन और रैना ने 5 ओवर में 16 रन दिए थे . यह प्रदर्शन तेज़ गेंदबाजों के मुकाबले कहीं बेहतर है . ऐसे में एक तेज़ गेंदबाज़ कम करके अमित मिश्र को अंतिम ग्यारह में स्थान दिया जा सकता है . तेज़ गेंदबाजों को मदद करने वाली पिचों पर अश्विन , मिश्रा और जडेजा के साथ उतरना निसन्देह एक जुआ है , लेकिन जब तेज़ गेंदबाजों से निराशा हाथ लग रही हो , तब ऐसा जुआ खेलना उचित प्रतीत होता है . शायद इसी तरीके से जीत हासिल हो जाए.

                             * * * * *

1 टिप्पणी:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बेस्ट विशेस टीम इंडिया के लिए ...

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