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शनिवार, अगस्त 13, 2011

ताज भी गया , आबरू भी गई


भारत तीसरा टेस्ट मैच चौथे दिन ही एक पारी और 242 रन से हार गया . अलेस्टर कुक ने 294  रन बनाए  और शर्म की बात यह रही की पूरी भारतीय टीम इस मैच में एक बार भी इतने रन नहीं बना पाई . एक बार वह 224 पर सिमट गई तो दूसरी बार 244 पर . भारतीय गेंदबाज़ इस मैच में पूरी तरह से रंगहीन नजर आए . इंग्लैण्ड ने मात्र सात विकेट पर 710 रन बना लिए . बीस विकेट लेने के स्वप्न देखने वाली टीम दस विकेट भी नहीं ले पाई , रही सही कसर बल्लेबाजों ने पूरी कर दी . अगर वे अच्छा खेलते तो मैच जीता भले न जाता बचाया तो जा ही सकता था लेकिन कोई भी बल्लेबाज़ जिम्मेदारी से नहीं खेला . जिस सहवाग से पूरे देश को उम्मीदें थी कि वह आते ही टीम की दशा बदल देगा वह दोनों पारियों में पहली गेंद पर आउट हो गया . सलामी बल्लेबाज़ का दोनों पारियों में पहली गेंद पर आउट होना शायद विश्व कीर्तिमान ही होगा ,और जिस टीम के बल्लेबाज़ ऐसे कीर्तिमान बनाए उसको बचाने वाला कौन होगा .धोनी ने श्रृंखला में पहली बार रन बनाए लेकिन अकेला चना भाड़ नहीं भोड़ सकता . सचिन से पूरा देश निराश है . वे अपनी लय में नजर नहीं आ रहे . गावस्कर ने भी उन्हें मैच फिट नहीं माना .
            कुल मिलाकर टीम ने सिर्फ नम्बर वन का ताज ही नहीं गंवाया , आबरू भी गंवाई है . इस श्रृंखला ने उन लोगों को बल प्रदान किया है जो भारत का नम्बर वन तक पहुंचना महज तुक्का मानते थे . भारतीय टीम आस्ट्रेलिया और  द. अफ्रीका में अच्छा प्रदर्शन कर चुकी थी . इंग्लैण्ड में अगर वे संघर्ष ही दिखा पाती तो उसकी इज्जत बनी रहती लेकिन उसने पूरी तरह से आत्म समर्पण ही कर दिया .
             टीम की इस बुरी दशा के लिए खिलाडी तो जिम्मेदार हैं ही ,साथ ही प्रशासक भी कम जिम्मेदार नहीं . IPL भी कुछ हद तक जिम्मेदार है . जहीर , गंभीर  ,सहवाग IPL में चोटिल हुए ,जिसका नतीजा टीम भुगत रही है . सचिन ने आराम लेने के लिए IPL को नहीं चुना वेस्ट इंडीज़ के दौरे को चुना , परिणामस्वरूप इंग्लैण्ड दौरे में वे लय हासिल नहीं कर सके.
              अब ताज हाथ से निकल चुका है , अंतिम टेस्ट मैच में करिश्मे की उम्मीद नहीं दिखती . शायद अभी और बेआबरू होना बाकि है . टीम इस झटके से कब तक उबर पाएगी यह समय ही बताएगा , फिलहाल टीम का वर्तमान अंधकारमय है .

                       * * * * *

1 टिप्पणी:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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