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मंगलवार, मई 10, 2011

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को IPL से खतरा

भारतीय टीम का विश्व कप के बाद पहला दौरा वेस्ट इंडीज़ का है .विश्व चैम्पियन होने और टेस्ट रैंकिंग में नम्बर एक होने के कारण भारतीय टीम से विश्व क्रिकेट को ढेरों उम्मीदें हैं ,लेकिन सहवाग का चोटिल हो जाना एक बुरी खबर है . विश्व कप और IPL के थकान भरे कार्यक्रम के बाद टीम अपने रंग में खेल पाएगी इसमें भी संदेह है .
            सहवाग IPL से चोटग्रस्त हुए हैं ,अन्य खिलाडी भी इस लीग की वजह से थक रहे हैं अगर भारतीय टीम वेस्ट इंडीज़ में अच्छा प्रदर्शन न कर पाई तो उसकी दोषी ये लीग होगी .हालांकि वेस्ट इंडीज़ इस समय कमजोर टीम है , ऐसे में चिंता की बात नहीं फिर भी IPL का आयोजन कितना सही है और कितना गलत यह एक विचारणीय विषय है . लसिथ मलिंगा के टेस्ट क्रिकेट से सन्यास का कारण भी यह लीग ही है . क्या यह इस बात का संकेत नहीं कि खिलाडी राष्ट्र की बजाए इस लीग को अहमियत दे रहे हैं . हालांकि मलिंगा का तर्क होगा कि उसने एक दिवसीय और टी-20 करियर को लम्बा खीचने के कारण टेस्ट से सन्यास लिया है ,लेकिन सच यह है कि अगर IPL न होता तो शायद हम मलिंगा को और टेस्ट खेलते देख सकते थे .IPL का लगभग 50 दिन का कार्यक्रम थकान नहीं देगा ऐसा कैसे माना जा सकता है ? खिलाडी पैसे के लिए इसमें खेल रहे है , इसके लम्बे कार्यक्रम से थक रहे हैं , चोटिल हो रहे हैं , और इस सबका खामियाजा भुगतेंगे राष्ट्र . सहवाग के चोट के बाद वेस्ट इंडीज़ दौरे से बाहर हो जाना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है .
             हम ऐसा नहीं कह सकते कि यह लीग बहुत बुरी है . इसके उजले पक्ष भी हैं . नए खिलाडियों और टीम से बाहर चल रहे खिलाडियों के लिए यह संजीवनी बूटी की तरह है . देश के सैंकड़ों खिलाडियों के लिए यह प्रदर्शन दिखाने का शानदार मंच है . विदेशी खिलाडियों और कोच का सानिध्य उन्हें मिलता है ,जिससे उनकी प्रतिभा  और निखरती है , लेकिन दो थकान भरे दौरे के बीच इसका आयोजन राष्ट्र की तरफ से खेल रहे खिलाडियों को और थकाता है . 
          IPL का चौथा संस्करण भी गलत मौके पर आयोजित एक बेवजह लम्बी खींची कवायद ही है . इसे विश्व कप के तुरंत बाद नहीं आयोजित किया जाना चाहिए था , क्योंकि विश्व कप खुद एक लम्बा और तनावपूर्ण आयोजन है . खिलाड़ियों को इस महत्वपूर्ण श्रृंखला के बाद आराम दिया जाना चाहिए था और इतना ही नहीं इसे बेहद लम्बा भी खींचा गया . इस लीग में दस टीमें हैं .ऐसे में एक टीम को 9 मैच खिलाना काफी रहता ,लेकिन उन्हें 14 मैच खिलाए गए .इस प्रकार 26 फालतू मैचों का आयोजन हुआ . क्या इन मैचों को कम करके खिलाडियों के लिए आराम का समय उपलब्ध नहीं करवाया जा सकता था ? BCCI को इस बारे में सोचना चाहिए , नहीं तो मलिंगा का अनुसरण करने वालों की लम्बी कतार हो सकती है . सहवाग की तरह चोटिल होकर बाहर होने वालों में कई नाम शामिल हो सकते हैं ,थकान का बहाना लेकर बाहर होने वाले नाम भी सामने आ सकते हैं . यदि ऐसा होता है तो BCCI को भले कोई नुक्सान न हो लेकिन अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को ठेस अवश्य लगेगी .

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1 टिप्पणी:

kkk ने कहा…

बहुत ही जानकारी पूर्ण व सचेत करने वाला लेख . निश्चय ही ध्यान देने व विचार करने योग्य बात है . धन्यवाद.

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