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सोमवार, नवंबर 07, 2011

कोई करिश्मा ही वापिसी दिलाएगा दिल्ली टेस्ट में

 दिल्ली टेस्ट मैच का दूसरा दिन भारत के दृष्टिकोण से बेहद निराशजनक रहा. हालाँकि गेंदबाजों ने अच्छा कार्य किया और आज सुब्ह जल्दी ही वेस्ट इंडीज की पारी को समेट दिया, इतना ही नहीं दूसरी पारी में भी शुरूआती विकेट दिलाए, लेकिन बल्लेबाजों ने उनकी मेहनत पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी. बल्लेबाजों की असफलता के कारण ही भारत ने इंग्लैण्ड में सभी टेस्ट गंवाए थे. इंग्लैण्ड में बुरा प्रदर्शन समझ में आता था. एक तो वहां की परिस्थितियाँ भारतीय बल्लेबाजों के अनुकूल नहीं थी, दूसरा किसी भी टेस्ट में सभी प्रमुख बल्लेबाज़ एक साथ नहीं खेल पाए थे, लेकिन यहाँ पर ऐसा कुछ नहीं था. हम घर पर अपने सभी प्रमुख बल्लेबाजों के साथ खेल रहे थे. इतना ही नहीं वेस्ट इंडीज का गेंदबाज़ी आक्रमण भी सामान्य ही है. ऐसे में टीम इण्डिया के बल्लेबाज़ी का बिखर जाना बेहद निराशाजनक है. 
                 टीम इण्डिया को बढिया शुरुआत मिल चुकी थी. भारत ने अपने सभी विकेट महज 120 रन पर गंवा दिए जिनमें 54 रन द्रविड़ के थे. इंग्लैण्ड में खेले गए मैचों की ही तरह द्रविड़ यहाँ भी साथी की तलाश में रहे, लेकिन कोई भी बल्लेबाज़ उनका साथ नहीं निभा पाया. पहली विकेट को छोड़कर कोई सांझेदारी नहीं बन पाई, परिणामस्वरूप बढत की तरफ देख रही टीम 95 रन से पिछड़ गई. हालाँकि वेस्ट इंडीज की दूसरी पारी की शुरुआत बढिया नहीं रही और उसके दो विकेट महज 21 पर निकल चुके हैं लेकिन अगर वे 200 रन बनाने में कामयाब हो गए तो दवाब भारतीय टीम पर ही होगा क्योंकि 300 रन का लक्ष्य कभी भी आसन नहीं रहता. भारतीय स्पिनरों की तरह देवेन्द्र बिशु चौथी पारी में खतरनाक साबित हो सकता है. वेस्ट इंडीज के तेज गेंदबाजों ने भी पहली पारी में अच्छी गेंदबाज़ी की विशेषकर कप्तान सामी का प्रदर्शन सराहनीय रहा. वे दूसरी पारी में अपने इसी प्रदर्शन को दोहरा सकते हैं. कुल मिलाकर अभी तक मैच वेस्ट इंडीज की मुट्ठी में है और कोई करिश्मा ही इसे भारत की तरफ ला सकता है. भारतीय गेंदबाज़ मैच में वापिसी के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाएंगे लेकिन जो गलती बल्लेबाजों ने की है उसे बल्लेबाजों को ही चौथी पारी में सुधारना होगा. यह एक बेहद मुश्किल काम है, लेकिन उम्मीद पर दुनिया कायम है. टीम इण्डिया से भी यही उम्मीद है कि वे तीसरे दिन वापसी करेंगे. 

                           * * * * *

1 टिप्पणी:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

नर हो न निराश करो मन को!
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शुभकामनाएँ!

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